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Bhagalpur Flood: घरों में 7 फीट तक पानी, गंगा में समा रहे मकान; भागलपुर में बाढ़ से हजारों परिवार बेहाल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | भागलपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर से दियारा और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर है। घरों में पानी भरने और तेज कटाव से कई परिवार प्रभावित हैं।

भागलपुर, 31 अगस्त। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर के दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। कहीं घरों के अंदर पानी पहुंच गया है तो कहीं खेत और सड़कें पूरी तरह जलमग्न हैं। कई परिवार अपने घरों में ही फंसे हुए हैं, जबकि जिन लोगों के मकान कटाव की चपेट में आ चुके हैं, वे सुरक्षित ठिकाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं।

भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में इस समय लोगों की निगाहें लगातार गंगा के जलस्तर पर टिकी हैं। लोगों को सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि यदि नदी का पानी और बढ़ा तो पहले से खराब हालात और गंभीर हो सकते हैं।

रसीदपुर दियारा में घरों के चारों ओर पानी

रसीदपुर दियारा में बाढ़ की स्थिति बेहद परेशान करने वाली है। गांव के कई घर पानी से घिरे हुए हैं। कुछ घरों में छह से सात फीट तक पानी पहुंचने की बात सामने आई है।

पानी के कारण सामान्य आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है। गांव से बाहर निकलने के रास्ते डूब चुके हैं। ऐसे में लोग छोटी नाव और स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए थर्मोकोल के तैरते साधनों का सहारा ले रहे हैं।

बच्चों और महिलाओं को भी इसी तरह पानी पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचना पड़ रहा है। कई परिवारों के घरों में रखा सामान पानी के कारण खराब हो रहा है। खाने-पीने की सामग्री भी धीरे-धीरे कम होने लगी है।

सबसे बड़ी परेशानी पीने के पानी की है। गांव के कई चापाकल बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। इससे लोगों को साफ पानी के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।

दियारा के कई गांव बाढ़ की चपेट में

शंकरपुर, दिलदारपुर, रतिपुर, बैरिया और रसीदपुर दियारा समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों में कुछ लोग अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों की ओर चले गए हैं।

कई परिवार भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर के टिल्ला कोठी क्षेत्र में भी शरण लेने पहुंचे हैं। वहां प्लास्टिक और अस्थायी व्यवस्था के सहारे परिवार रहने को मजबूर हैं।

बच्चों के साथ खुले वातावरण में रात गुजारना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। बाढ़ पीड़ित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता भोजन, पीने का पानी और सुरक्षित रहने की जगह को लेकर है।

लोगों का कहना है कि उन्हें पानी घटने का इंतजार है, ताकि वे अपने घरों में लौट सकें। लेकिन फिलहाल गंगा के तेवर को देखते हुए उन्हें राहत की उम्मीद ही नजर आ रही है।

इंग्लिश फराका में कटाव से दहशत

सबौर प्रखंड के इंग्लिश फराका गांव में बाढ़ के साथ गंगा का कटाव भी लोगों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले तीन दिनों में करीब 15 से 16 घर नदी में समा चुके हैं।

कटाव की रफ्तार इतनी तेज बताई जा रही है कि ग्रामीण अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थान की ओर जाने को मजबूर हैं। कई परिवारों को अपना सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।

ग्रामीणों के मुताबिक जब घर का हिस्सा नदी की तरफ धंसने लगा तो सबसे पहले बच्चों और मवेशियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घर में रखा सामान और खाद्य सामग्री वहीं छूट गई।

ग्रामीण बोले- सिर्फ बोरे डालने से नहीं रुकेगा कटाव

कटाव प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि गंगा लगातार नीचे से मिट्टी काट रही है। ऐसे में केवल ऊपर से बोरे डालकर कटाव रोकना मुश्किल होगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मजबूत और प्रभावी फ्लड फाइटिंग कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव के कई अन्य घर भी अब कटाव के मुहाने पर खड़े हैं।

लोगों में इस बात की दहशत है कि जिस तरह नदी तेजी से जमीन काट रही है, उसमें अगली सुबह किसी और परिवार का घर भी गंगा में समा सकता है।

तटबंध में कटाव के बाद बढ़ी परेशानी

भागलपुर में बाढ़ की चिंता उस समय और बढ़ गई थी जब 24 अगस्त को खरीक अंचल के काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल तटबंध में कटाव की स्थिति बनी थी।

रात करीब ढाई बजे गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज जलदाब के कारण तटबंध का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद पानी नवगछिया की दिशा में जाने लगा।

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों ने तटबंध की स्थिति को संभालने के लिए सुरक्षा कार्य शुरू किए।

डीएम ने संभाली निगरानी

भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय की ओर से भी स्थिति की निगरानी की जा रही है। आपदा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी संवेदनशील क्षेत्रों में मौजूद हैं।

प्रशासन की प्राथमिकता तटबंधों को सुरक्षित रखना, कटाव वाले स्थानों पर तत्काल सुरक्षा कार्य करना और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना है।

बाढ़ ने रोक दी सामान्य जिंदगी

भागलपुर के दियारा इलाकों में बाढ़ केवल पानी भरने की समस्या नहीं रह गई है। इसने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

खेत पानी में डूब चुके हैं। सड़कें नजर नहीं आ रही हैं। घरों में पानी पहुंच चुका है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है और परिवारों के सामने भोजन तथा पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है।

जिन परिवारों के घर कटाव में चले गए, उनके सामने रहने की सबसे बड़ी समस्या है। ऐसे लोगों के लिए राहत शिविर और सुरक्षित स्थान ही फिलहाल सहारा हैं।

लोगों को अब राहत का इंतजार

बाढ़ प्रभावित परिवारों की निगाह अब प्रशासन की राहत व्यवस्था पर टिकी है। लोगों की मांग है कि भोजन, पीने का पानी, नाव और सुरक्षित रहने की व्यवस्था जल्द उपलब्ध कराई जाए।

कटाव प्रभावित परिवार चाहते हैं कि उनके घरों और गांव को बचाने के लिए युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मजबूत कार्रवाई नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है।

फिलहाल भागलपुर में गंगा का जलस्तर और नदी के कटाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। हर परिवार की यही उम्मीद है कि गंगा का पानी अब और न बढ़े और जल्द हालात सामान्य हों।

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बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, उजड़ते परिवारों की कहानी है

भागलपुर में बाढ़ की तस्वीर सिर्फ जलमग्न सड़कों और घरों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे ऐसे परिवार हैं जिनकी पूरी जमा-पूंजी पानी और कटाव की भेंट चढ़ रही है। किसी के घर में कई फीट पानी जमा है तो किसी का आशियाना नदी की धारा में समा चुका है।

सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों की है जिन्हें अचानक घर छोड़ना पड़ा। ऐसे लोगों के सामने सुरक्षित जगह, भोजन, पीने का पानी और बच्चों की जरूरतें पूरी करने की चुनौती है।

कटाव की समस्या और भी गंभीर है, क्योंकि पानी घटने के बाद भी जमीन और घरों के नदी में समाने का खतरा बना रहता है। इसलिए सिर्फ तत्काल राहत पर्याप्त नहीं होगी। प्रभावित गांवों में स्थायी कटावरोधी उपाय और सुरक्षित पुनर्वास की योजना पर भी ध्यान देना होगा।

प्रशासन की सक्रियता इस समय बेहद जरूरी है। जहां तटबंध कमजोर हैं, वहां समय रहते सुरक्षा कार्य हो और जहां घर कटाव के मुहाने पर हैं, वहां लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए।

बाढ़ के बीच सबसे बड़ी जरूरत यही है कि प्रभावित परिवारों को यह भरोसा मिले कि वे अकेले नहीं हैं और सरकार उनके साथ खड़ी है।

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